सारांश प्रस्तुत शोध-पत्र छत्तीसगढ़ राज्य में विगत दस वर्षों के दौरान संचालित विभिन्न कृषि योजनाओं का किसानों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति पर पड़े प्रभाव का समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से विश्लेषण करता है। छत्तीसगढ़ एक कृषि प्रधान राज्य है, जहाँ अधिकांश जनसंख्या कृषि एवं उससे संबंधित गतिविधियों पर निर्भर है। ऐसे में किसानों के विकास हेतु केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा अनेक योजनाएँ लागू की गई हैं, जिनका उद्देश्य कृषि उत्पादन में वृद्धि, किसानों की आय में सुधार, सामाजिक सुरक्षा तथा जीवन-स्तर को ऊँचा उठाना रहा है। इस अध्ययन में प्रमुख योजनाओं जैसे न्यूनतम समर्थन मूल्य एवं धान खरीदी व्यवस्था, किसान क्रेडिट कार्ड, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Dbt) एवं राज्य स्तरीय किसान कल्याण योजनाओं का समग्र अध्ययन किया गया है। शोध के लिए प्राथमिक एवं द्वितीयक दोनों प्रकार के आँकड़ों का उपयोग किया गया है। प्राथमिक आँकड़े चयनित जिलों के किसानों से साक्षात्कार एवं प्रश्नावली के माध्यम से एकत्र किए गए, जबकि द्वितीयक आँकड़े सरकारी रिपोर्टों, कृषि विभाग के अभिलेखों एवं पूर्ववर्ती शोध अध्ययनों से प्राप्त किए गए हैं। अध्ययन के निष्कर्ष दर्शाते हैं कि पिछले दस वर्षों में कृषि योजनाओं के प्रभाव से किसानों की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। कृषि उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, कृषि जोखिमों में कमी तथा आय के स्रोतों में विविधता देखी गई है। सामाजिक स्तर पर किसानों की शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, सामाजिक सुरक्षा एवं संस्थागत सहभागिता में सुधार हुआ है, जिससे उनके सामाजिक दर्जे एवं आत्मसम्मान में वृद्धि हुई है। तथापि, योजनाओं के क्रियान्वयन में क्षेत्रीय असमानता, सीमांत किसानों की सीमित पहुँच, जागरूकता की कमी एवं प्रशासनिक जटिलताएँ जैसी समस्याएँ अभी भी विद्यमान हैं। निष्कर्षतः, कृषि योजनाएँ छत्तीसगढ़ के किसानों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण का एक प्रभावी साधन सिद्ध हुई हैं, परंतु इनके प्रभाव को अधिक समावेशी एवं स्थायी बनाने हेतु नीतिगत सुधार एवं सुदृढ़ क्रियान्वयन की आवश्यकता है।
Jaiswal et al. (Thu,) studied this question.