अध्ययन का पृष्ठभूमि: समकालीन समाज में दावाह का सामना दोनों श्रावकों और श्रुतों से कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। यह दोनों पक्षों के प्रति रखी गई दृष्टिकोण का परिणाम है। पेपर का उद्देश्य और दायरा: यह पेपर दावाह के समकालीन विद्वानों के दृष्टिकोण को संशोधित करने और जन साधारण को सत्य से विमुख होने के खिलाफ चेतावनी देने के लिए इस्लाम के शरीया में निर्धारित इस्लामी दावाह पद्धतियों को स्पष्ट करता है। विधियाँ: निर्धारित उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए, इस पेपर ने विश्लेषणात्मक और अनुभवजन्य अनुसंधान विधियों को अपनाया। विश्लेषणात्मक पद्धति का उपयोग दावाह के अर्थ, दावाह के महत्व और इस्लामी दावाह पद्धतियों को समझाने के लिए किया गया है, जबकि अनुभवजन्य विधि का उपयोग समकालीन नाइजेरियाई समाज में दावाह की चुनौतियों को स्पष्ट करने के लिए किया गया है। परिणाम: निष्कर्षों ने दिखाया है कि दावाह की विफलता अधिकांश समकालीन श्रावकों द्वारा अपनाए गए दृष्टिकोण के कारण है, यह भी पाया गया है कि कई श्रावक इस्लामी सामान्य दावाह उद्देश्यों से भिन्न प्रेरणा के साथ दावाह गतिविधियों में शामिल होते हैं। निष्कर्ष: पेपर इस सिफारिश के साथ समाप्त होता है कि किसी भी इच्छुक श्रावक के लिए पर्याप्त इस्लामी ज्ञान होना चाहिए ताकि वह अपनी दावाह यात्रा में सफल हो सके।
हमद अंबाली (सैट,) ने इस प्रश्न का अध्ययन किया।