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यह शोध पत्र मेर्लो- pointee के अनुभववाद का उपयोग करता है यह पता लगाने के लिए कि क्या चीज़ एक अभिव्यक्ति को परिवर्तनीय बनाती है। जब एक अनुभव और इसकी अभिव्यक्ति असंगत हो जाती है, तो व्यक्ति के अस्तित्व में एक असामंजस्य होता है, और दोनों को फिर से संरेखित करके ही व्यक्ति अपने विश्व की सीमाओं और संभावनाओं का पुनः मोलभाव कर सकता है। कला, भाषा, और अस्तित्वात्मक अभिव्यक्ति के विभिन्न रूपों की खोज के माध्यम से, जिसमें वे रूप भी शामिल हैं जो भ्रामक या विकृत हैं, यह शोध पत्र दिखाने की आशा करता है कि मौन, सृजनशीलता, और शैली किसी भी परिवर्तनीय अभिव्यक्ति के अनिवार्य तत्व हैं। ये तत्व विषय के आदर्श के साथ संवेदनशील दुनिया में उनकी जीवन्त भागीदारी के माध्यम से मिलने की सुविधा देते हैं। वास्तविकता में आदर्श की अनुभवात्मक मुठभेड़ को अभिव्यक्त करने से अनुभव की गहरी सच्चाई को प्रकट किया जाता है और दुनिया को नए अर्थ के स्तर के अनुसार परिवर्तित किया जाता है।
गैब्रिएला विल (मंगल,) ने इस प्रश्न का अध्ययन किया।