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यह लेख मारी क्षेत्र (1917‒1941) में चर्च गायन के इतिहास का अध्ययन करता है। यह अध्ययन हमें मारी क्षेत्र के इतिहास में कई महत्वपूर्ण समस्याओं को हल करने की अनुमति देता है। इनमें चर्च गायन संस्कृति, सोवियत काल में रूसी ऑर्थोडॉक्स चर्च की स्थिति, मारी बुद्धिजीवियों की गतिविधियाँ शामिल हैं, जिसने केवल स्वदेशी मारी जनसंख्या के ईसाईकरण और शिक्षा की प्रक्रियाओं को प्रभावित नहीं किया, बल्कि स्थानीय निवासियों की संस्कृति, मानसिकता और जीवन की गुणवत्ता को भी। 19 वीं सदी के अंत और 20 वीं सदी के प्रारंभ में इस संबंध में फलदायी समय था। उस समय एक आधार स्थापित हुआ, जिसने चर्च के सोवियत दमन के वर्षों में स्थानीय धर्मगुरुओं, साधुओं, श्रेणी श्रमिकों, और गायक सदस्यों के बीच नए शहीदों और विश्वासियों का खुलासा किया। उल्लेखित विषय का अध्ययन हमें यह बताने की अनुमति देता है कि मारी भूमि का चर्च-गायन संस्कृति, साथ ही देश के अन्य क्षेत्रों में, एक बहुत कठिन स्थिति में था। चर्च गायन की परंपराएँ, जो क्रांति पूर्व के समय में स्थापित हुई थीं, इन वर्षों के दौरान व्यावहारिक रूप से बाधित हो गई थीं। कई लोगों को एंटी-धार्मिक दमन से जुड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। बहुत कम लोग सभी परीक्षणों को सहन कर पाए और
अल्बिना सिमाकोवा (शुक्रवार) ने इस प्रश्न का अध्ययन किया।