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उद्देश्य: हमारी भावनात्मक स्थिति के पहलू लगातार हमारे चेहरे के भावों के माध्यम से प्रसारित होते रहते हैं। मनोचिकित्सीय सिद्धांत रोगियों और चिकित्सकों के बीच भावनात्मक गतिकी के महत्व को उजागर करते हैं ताकि प्रभावी चिकित्सा संबंध सुनिश्चित हो सके। साहित्य द्वारा सुझाई गई दो भावनात्मक गतिकाएं भावनात्मक चेतना (यानी, जब एक व्यक्ति दूसरे को प्रतिक्रिया करता है) और भावनात्मक स्थिरता (यानी, जब एक व्यक्ति किसी निर्धारित भावनात्मक स्थिति में रहने की प्रवृत्ति रखता है) हैं। फिर भी, इन गतिकाओं और चिकित्सा संबंध के बीच के संबंध के बारे में अनुभवजन्य जानकारी बहुत कम है। यह अध्ययन चिकित्सा संबंध और चेतना और स्थिरता की भावनात्मक गतिकाओं के बीच के संबंध की जांच करता है, जो सत्र के भीतर रोगियों और चिकित्सकों के चेहरे के भावों में प्रकट होती हैं। विधियाँ: चौरासी रोगियों के साथ जो प्रमुख अवसादात्मक विकार से ग्रस्त थे, अवसाद के लिए अल्पकालिक उपचार किया गया (N = 1256 सत्र)। परिणाम: चिकित्सक की चेतना और स्थिरता दोनों का संबंध सभी समय सीमाओं में संबंध से था। रोगी की चेतना केवल एक संक्षिप्त समय सीमा (1 सेकंड) में संबंध से जुड़ी थी। निष्कर्ष: ये निष्कर्ष चिकित्सकों को क्षेत्र में न केवल अपने रोगियों के प्रति अपनी भावनात्मक प्रतिक्रिया को कम करने, बल्कि उपचार कक्ष में अपनी अनूठी उपस्थिति को भी कम करने में मदद कर सकते हैं।
Tal et al. (मंगल,) ने इस प्रश्न का अध्ययन किया।