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सारांश: आपूर्ति संबंधों में पारदर्शिता से जुड़ी समस्याएं — ग्राहक और आपूर्तिकर्ता के बीच जानकारी और ज्ञान का द्विपक्षीय आदान-प्रदान — प्रबंधकों के लिए दीर्घकालिक कठिनाई का कारण हैं। ऐसे आदान-प्रदान की संवेदनशीलता उनकी प्रभावशीलता और मूल्य को बाधित या प्रभावहीन बना सकती है। यह पारदर्शिता के प्रकारों पर अपर्याप्त विचार और संबंध में ग्राहक के प्रभुत्व के झुकाव के कारण हो सकता है। यह शोध इन कठिनाइयों का अन्वेषण करने का उद्देश्य रखता है ताकि इस संदर्भ में पारदर्शिता की गतिशीलता और विभिन्न स्वभाव (जिसमें मूल्य पारदर्शिता की प्रस्तावित स्थिति शामिल है) को समझा जा सके और इसे व्यवहार में लाने के तरीके सुझाए जा सकें। पारदर्शिता के लिए पहचाने गए सामाजिक और प्रौद्योगिकी-संचालित प्रेरकों के अलावा, आपूर्ति में इस अवधारणा के लिए शोध दृष्टिकोण इस अवलोकन द्वारा प्रेरित है कि औद्योगिक या व्यावसायिक खरीददारों और उनके आपूर्तिकर्ताओं के बीच होने वाली कई पारंपरिक दिनचर्याएं और क्रियाकलाप अनावश्यक और व्ययशील हो सकते हैं। यह लेख इस परिकल्पना का पृष्ठभूमि प्रस्तुत करता है और अवधारणा की चर्चा के लिए एक ढांचे के विकास को दर्ज करता है।
Lamming et al. (Sat,) ने इस प्रश्न का अध्ययन किया।
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