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सार उद्देश्य: 1980-91 के दौरान निदान किए गए कैंसर वाले बच्चों की जीवित रहने की दरों की जांच करना है ताकि जनसंख्या के आधार पर चिकित्सा देखभाल में विकास के प्रभाव का आकलन किया जा सके। डिज़ाइन: पूर्ववर्ती समूह अध्ययन। सेटिंग: ग्रेट ब्रिटेन। विषय — 1980-91 के दौरान निदान किए गए कैंसर वाले 14,973 बच्चे और राष्ट्रीय पंजीकरण में शामिल। मुख्य परिणाम उपाय: आकुशलता जीवित रहने की दरें। परिणाम: सभी कैंसरों के लिए संयुक्त रूप से, 1980-2 और 1989-91 के बीच दो वर्ष की जीवित रहने की दर 66% से बढ़कर 76% हो गई, और पांच वर्ष की जीवित रहने की दर 1980-2 और 1986-8 के बीच 57% से बढ़कर 65% हो गई। तीव्र लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया, तीव्र नॉन-लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया, रेटिनोब्लास्टोमा, ऑस्टियोसारकोमा, यूविंग का सारकोमा, रबडोमायोसारकोमा, और घातक गोनाडल जर्म सेल ट्यूमर वाले बच्चों में जीवित रहने की दरों में महत्वपूर्ण वृद्धि देखी गई। हॉजकिन's रोग, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र ट्यूमर, न्यूरोब्लास्टोमा, या विल्म्स ट्यूमर वाले बच्चों में जीवित रहने में कोई प्रवृत्ति नहीं देखी गई। निष्कर्ष: कैंसर के निदान वाले बच्चों में से लगभग दो तिहाई अब कम से कम 10 वर्षों तक जीवित रहने की अपेक्षा कर सकते हैं।
चार्ल्स स्टिलर (विश्राम,) ने इस प्रश्न का अध्ययन किया।