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संक्षेप यह लेख बदलते कर्मचारी-नियोक्ता संबंध (मनोवैज्ञानिक अनुबंध) को समझने और प्रबंधित करने के महत्व पर चर्चा करता है। यह बदलती कर्मचारी-नियोक्ता अपेक्षाओं पर एक संक्षिप्त चर्चा प्रदान करता है और कर्मचारी-नियोक्ता संबंधों के प्रबंधन में मनोवैज्ञानिक अनुबंध के महत्व पर परिभाषा और चर्चा प्रस्तुत करता है। कई कर्मचारी-नियोक्ता इंटरैक्शन, जिनमें मानव संसाधन प्रबंधन (HRM) कर्मी मनोवैज्ञानिक अनुबंध को स्पष्ट और पुनः आकार देने में सहायता कर सकते हैं, प्रस्तुत किए गए हैं।
रोनाल्ड आर. सिम्स (1994) ने इस प्रश्न का अध्ययन किया।
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