बालकों के मानसिक स्वास्थ्य के निर्माण में घर, विद्यालय और समाज की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। घर वह पहला स्थान है जहाँ बच्चा प्रेम, सुरक्षा और मूलयों को सीखता है। माता- पिता का स्नेह, संवाद और सहयोगात्मक वाता-वरण बच्चे में आत्मविश्वास, भावनात्मक संतुलन और सकारात्मक व्यक्तित्व का विकास करता है। विद्यालय बालकों के बौद्धिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास का केन्द्र होता है। शिक्षक का सहायक व्यवहार, स्वास्थ अनुशासन और प्रेरणादायक शिक्षण वातावरण बच्चों में आत्मसम्मान, सहयोग और समस्या समाधान को बढ़ाता है। समाज भी बालकों के मानिसक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, क्योंकि सामाजिक मान्यताएँ, सांस्कृतिक परंपराएँ और सामुदायिक समर्थन उनके व्यवहार और दृष्टिकोण को आकार देते हैं। सुरक्षित सहयोगी और नैतिक मुल्यों से युक्त समाज बालकों में सकारात्मक मानसिक स्वास्थ्य का निर्माण करता है। अतः घर, विद्यालय, और समाज का समन्वित प्रसाय ही बालकों के संतुलित मानसिक स्वास्थय की आधारशिला होती है।
डॉ. सुभाष कुमार सुमन (Wed,) studied this question.