भाषा अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। मनुष्य की समस्त छटपटाहट अभिव्यक्ति के लिए ही होती है। भाषा के कारण ही मनुष्य पशुओं से भिन्न माना गया है। एक महान भाषाविद् का कथन है कि मनुष्य कितना सौभाग्यशाली प्राणी है कि उसके पास भाषा है। यह कथन इस तथ्य की ओर संकेत करता है कि भाषा मनुष्य की विशिष्ट पहचान है। इसका तात्पर्य यह है कि भाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम ही नहीं हैबल्कि मनुष्य ने अपने मस्तिष्क की रचनात्मक शक्ति से विभिन्न कलाओं का आविष्कार कर अभिव्यक्ति की सर्वोत्तम मिसालें प्रस्तुत की हैं। जहाँ तक भाषा की बात है, वह हमारी तरल एवं सूक्ष्म भावनाओं तथा विचारों की अभिव्यक्ति का सशक्त साधन है। भाषा में निपुणता भाषा-कौशलों के माध्यम से प्राप्त होती है। भाषा के मुख्य चार कौशल माने गए हैं- श्रवण, वाचन, पठन और लेखन। यदि रोजगार की दृष्टि से देखा जाएतो भाषा-कौशल और रोजगार का अत्यंत घनिष्ठ संबंध है। शायद ही विश्व का कोई ऐसा क्षेत्र हो जहाँ भाषाकौशल की आवश्यकता न हो। कलाओं से लेकर व्यापार तक, विज्ञान से लेकर ललित कलाओं तक तथा शिक्षा से लेकर साहित्य तकसभी क्षेत्रों में भाषा-कौशल अनिवार्य हैं। यदि कोई व्यक्ति भाषा-कौशलों में निपुण है, तो उसके सामने रोजगार की अनेक संभावनाएँ खुल जाती हैं। व्यक्ति अपने भाषा-कौशलों को विकसित कर सफलतापूर्वक रोजगार प्राप्त कर सकता है। इस आलेख में रोजगार के अवसर एवं भाषा-कौशलों के महत्व पर विवेचन किया गया है।
Dr. Anant Kedare (Sun,) studied this question.