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May 7, 2026International Journal of Novel Research and Development0 citationsOpen Access

असगर वजहत क सहतय पर वशवकरण कपरभव

HIHon. Navnath Devrao Ingle

Key Points

  • The aim is to explore how globalization influences cultural values and social behavior.
  • Literary analysis of stories and plays by Asgar Wajahat such as 'Swimming Pool' and 'Smidhi'.
  • Exploration of themes like corruption and consumerism in contemporary society.
  • Examination of societal changes in relation to globalization and advertisements.
  • Globalization leads to the erosion of traditional cultures and societal values.
  • Consumerism and capitalism overshadow moral and intellectual virtues in society.
  • Literature reflects the ongoing transformations and challenges posed by globalization.

Abstract

मंडलीकरण ने मनुष्य की प्रतियोगिता को इतना तीव्र कर दिया कि वह अपनी इच्छाएँ पूरी करने के लिए पूर्णता मैदान में उतरा है। कई जगहों पर पशुओं से बदतर व्यवहार करने लगा है। इस प्रतियोगी दौर में संस्कृति और परंपरा के बारे में कोई सोच विचार करते नही दिखरहा है। जब संस्कृति पर चोट पड़ती है तब हमारे तरीके बदल जाते हैं।हम प्रतिरोध करने का प्रयास करते हैं प्रतिरोध से बदलाव नहीं हुआ तो धीरे-धीरे उस बदलाव को ही स्वीकार करते हैं। इससे नई संस्कृति का उदय होता है। भूमंडलीकरण ने हमें अन्य राष्ट्रों के बाजारों के द्वार खोल दिए लेकिन हमारी संस्कृति के किवाड़ हमेशा-हमेशा के लिए बंद कर दिए। आज विज्ञापनों का दौर आया जो टीवी और मोबाइल द्वारा हमारे घर तक पहुँच गया। हमारे रहन-सहन, सोच विचार, संस्कृति यह सब बदल गए। साहित्य में भी बदलाव आ गया। ऐसे-ऐसे विज्ञापन निर्माण हुए जिन्हें परिवार के साथ बैठकर देखना मुनासिब नहीं है। भूमंडलीकरण के इस बाजारू अप संस्कृति ने हमारी परंपरा पर गहरा प्रभाव डाला। इसने वर्तमान के साथ-साथ हमारे भविष्य पर भी प्रश्न चिन्ह उपस्थिति किए। भूमंडलीकरण ने इंसान को मशीनों में उलझा दिया है। सब कुछ मिलने की कोशिश में उसे कुछ भी हासिल नहीं हो रहा है। इस संदर्भ में सुधीश पचौरी का वक्तव्य है, “अब इंसान इस ग्रह का नियंता और ईश्वर को सबसे खूबसूरत रचना नहीं बल्कि उपभोक्ता है। यहाँ सबके लिए सब कुछ है लेकिन फिर भी किसी को कुछ हासिल नहीं होता। उत्तर आधुनिक के इस कालखंड को सकारात्मक पहचान देने के लिए स्वास्थ्य और सार्थक बहस को परिणाम तक पहुँचाना ही होगा।”1 समाज में धन की प्रतिष्ठा पूंजीपतियों को श्रेष्ठ स्थान देती है। धन के आगे धर्म, बुद्धि, प्रेम यह सब फीके हैं। दौलत से यह सब खरीदा जाता है। राजनीति पर भी धन दौलत का प्रभाव दिखाई पड़ता है। धनी लोग आम आदमी की जान भी ले लेते हैं। तो भी उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। नेता अपना वर्चस्व अच्छेसे बनाए रखने के लिए जनता को मूर्ख बनाते हैं। यही व्यवस्था सब जगह पर शुरू है। भ्रष्ट व्यवस्था और पूंजीवादी स्थिति ने समाज को खोखला बना दिया है। असग़र वजाहत जी ने ‘स्विमिंग पूल’ नाम के कहानी में यह सब दिखाने का प्रयास किया है। घर के पास गंदे नाले की बार-बार शिकायत करने पर भी नाला साफ नहीं होता। एक दिन वही नाला जमाने की खुशियाँ और सपने लेकर डूबता है। इस कहानी में गंदा नाला यह एक प्रतीक है। भ्रष्टाचार का प्रतीक जो कभी खत्म होने वाला नहीं है। भूमंडलीकरण से बदलने वाले जीवन क्रम और बदलती हुई संस्कृति को इसमें दिखाया गया है। नाले में जो फूल, किताबें, पेड़, घोसला, शहनाई आदि टूटी-फूटी चीजें गिरी हुई है वह समय के साथ-साथ लुप्त होने वाली हमारी संस्कृति है। ऐसा कहानीकार को लगता है। यह समाज के बदलाव के संकेत है। बाल शोषण और नारी भ्रूण हत्या जैसे गंभीर विषयों पर कहानीकार ने सूक्ष्मता से चित्रण किया है।उनकी ‘पिचासी कहानियों’ में वैश्वीकरण का प्रभाव दिखाई पडता है।स्विमिंग पूल, ड्रेन में रहनेवाली लडकियाँ,बनना, आग, गिरफ्त,सूफी का जूता,सरगम कोला आदि कहानियों के साथ-साथ‘समीधा’और ‘वीरगति’ नाटकों में भी वैश्वीकरण का प्रभाव स्पष्ट दिखाई पडता है।

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Cite This Study

Hon. Navnath Devrao Ingle (2026) studied this question.

synapsesocial.com/papers/69fc2b158b49bacb8b3476f6https://doi.org/10.56975/ijnrd.v11i2.312358
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