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May 7, 2026International Journal of Novel Research and Development0 citationsOpen Access

छततसगढ क नदय : नई अरथवयवसथ म भष सहतय और वणजय क ससकतक वमरश

SLSanju LaderDSDr. Radha Sharma

Key Points

  • छत्तीसगढ़ की नदियों के सांस्कृतिक, वाणिज्यिक और आर्थिक महत्व का विश्लेषण करना।
  • सांस्कृतिक और साहित्यिक अध्ययन
  • साक्षात्कार और स्थानीय लोककथाओं का संग्रह
  • वाणिज्यिक संभावनाओं का मूल्यांकन
  • नदियों का सांस्कृतिक महत्व लोकजीवन और भाषाई धाराओं से जुड़ा है।
  • आधुनिक औद्योगीकरण ने नदियों की स्थिति को चुनौती दी है।
  • सतत विकास में नदियों की संरक्षण प्रवृत्तियों को प्रमुखता दी जानी चाहिए।

Abstract

छत्तीसगढ़ की नदियाँ केवल जल धारा नहीं बल्कि संस्कृति, लोकजीवन, और आर्थिक चेतना की धारा हैं। महानदी ,शिवनाथ,इंद्रावती, हसदेव, लीलागर नदी, पैरी और अरपा जैसी नदियाँ प्रदेश के सांस्कृतिक, वाणिज्यिक जीवन का मूल आधार रही है। भाषा और साहित्य में इन नदियों का स्वरूप प्रतीकात्मक है वे मातृत्व, सृजन, प्रेम, करुणा और निरंतरता की अभिव्यक्ति बनकर उभरती है, लोकगीतों, कविताओं, और लोककथाओं में नदी जीवन की गति और भावनात्मक प्रवाह का रुप लेती है। वहीं वाणिज्यिक दृष्टि से नदियाँ, कृषि, मत्स्यपालन, जलविद्युत और, पर्यटन के माध्यम से नई अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाती हैं। नदियाँ लोक आस्था, परंपरा और सामुदायिक एकता की वाहक है, वे छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को स्थायित्व और जीवंतता प्रदान करती हैं। परन्तु आधुनिक औद्योगीकरण और प्रदूषण ने इन नदियों की पवित्रता और अस्तित्व दोनों को चुनौती दी है। नई अर्थव्यवस्था में नदियों का महत्त्व केवल आर्थिक नहीं बल्कि भाषाई साहित्यिक और सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ा हुआ है। सतत विकास के लिए आवश्यक है कि नदियों को केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं बल्कि संस्कृति की धारा के रुप में देखा जाए। महानदी को मां “मईया “कहकर संबोधित करने वाली लोक कथाएँ एवम करमा गीतों में नदी की धारा को जननी बताया गया है, जो भाषा की मौलिकता को जल की शुद्धता से जोड़ती है। नई अर्थव्यवस्था के परिपेक्ष्य में यह भाषाई धरोहर डिजिटल कंटेट एवम् सॉफ्ट वेयर के रूप में पुनर्जनन की संभावना रखती हैं। समकालीन साहित्यकारों की कृतियों में नदी एक ओर सांस्कृतिक, साहित्यिक पुनर्जागरण का स्रोत होती हैं तो, दूसरी ओर पर्यावरणीय विस्थापन का दुखांत प्रतीक है। नवउदारवादी खनन नीतियों के कारण विस्थापित ग्रामों की पीड़ा को नदी की सूखती धारा में अभिव्यक्त करती हैं। नदी, तटीय, जल पर्यटन, हैंडलूम, ब्रांडिग में नदी प्रेरित डिजाईन एवम् ओ टी टी प्लेट फार्म पर नदी की पृष्ठभूमि, ये सभी नई अर्थव्यवस्था के सांस्कृतिक उद्यम के उदाहरण हैं। विकास के माडल में सांस्कृतिक जल प्रबंधन को समावेशित करना अनिवार्य है जो छत्तीसगढ की नदियों को संरक्षित करते हुए समृद्धि की नई गाथा रचेगी।

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Cite This Study

Lader et al. (2026) studied this question.

synapsesocial.com/papers/69fc2b608b49bacb8b34774ahttps://doi.org/10.56975/ijnrd.v11i2.312364
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