परम्परा के अनुसार मनुष्य का सौन्दर्य मूलतः एक प्रकार का ऐन्द्रिय संवेदनों तथा मानसिक चिन्तन पर निर्भर करता है। सौन्दर्यशास्त्र दर्शन की एक शाखा है जिसका विवेचित विषय कला तथा प्रकृति का सौन्दर्य है। यह एक ऐसा विषय है, जिसमें सौन्दर्य अथवा कला व ललित कलाओं का समग्र क्षेत्र समाहित हो जाता है।
Dr. Reshma Kumari (Thu,) studied this question.