आज का समय बदल गया है,समाज बदल रहा है। मनुष्य का जीवन अधिक जटिल गतिशील और चुनौती भरा हो गया है। मीडिया, ग्लोबलाइजेशन, राष्ट्रीय उद्योग और वैश्वीकरण के प्रभाव के कारण अन्य सभी क्षेत्र के साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में कई चुनौतियां और अवसरों का निर्माण हो रहा है। ज्ञान के क्षेत्र में शाखा -उपशाखाओं का विकास होने लगा और विद्या के विभिन्न क्षेत्र युवकों के लिए खुले होने लगे। इस परिवर्तन पूर्ण प्रक्रिया में विज्ञान ,प्रौद्योगिकी, वाणिज्य, व्यवस्थापन की प्रासंगिकता और व्यापकता बढ़ रही है। भारतीय शिक्षा व्यवस्था की नींव प्रसार, सुसंस्कारी नागरिक का निर्माण राष्ट्रभाषा की चेतना जागृति रही हैं । आज शिक्षा शैक्षिक अर्हता का संबंध जीविका चलाने तथा व्यवसाय -रोजगार के साथ जोड़ दिया जाता है। जो शिक्षा रोजी-रोटी की प्रणाली में सहाय्यक है, उसी की ओर आज की पीढ़ी आकर्षित हो रही है। बेरोजगारी की समस्या हल करने का साधन रोजगारोन्मुख शिक्षा पाठ्यक्रम ही है ।आज किताबी शिक्षा की अपेक्षा रोजगार की शाश्वती देने वाली शिक्षा आवश्यक बनी है। हिंदी अवसर के क्षेत्र शिक्षक, अध्यापक, विभिन्न उद्यम, अनुवाद, ब्यूरो कार्यालय, केंद्र सरकार के कार्यालय, वृत्तपत्र समूह, डॉक्टर, वकील, व्यवसायी, प्रकाशन संस्था, मॉल, कॉरपोरेट्स, शैक्षिक संस्था, शोध संस्था, बैंक, मार्केटिंग क्षेत्र, मीडिया, निर्मितीगृह, विज्ञापन कंपनियां, होटल, परिवहन, इलेक्ट्रॉनिक माध्यम आदि। रोजगार आज के युग की बड़ी ज्वलंत समस्या है। प्रत्येक विद्यार्थी अपनी पढ़ाई के दौरान इस विषय पर मंथन जरूर करता है कि वह जिस विषय में शिक्षा प्राप्त कर रहा है, उसमें उसके लिए रोजगार की कितनी संभावनाएं हैं। हिंदी भाषा का यही कौशल रोजगार के कितने शुअवसर छात्रों को प्राप्त होते है इस विषय पर चर्चा करेंगे
Prof. Dr. Mangal Milind Kamble (Sun,) studied this question.