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उद्देश्य: कृत्रिम बुद्धिमता (AI) की सीमाओं और जटिलता एवं प्रणाली-वैज्ञानिक विचार-विमर्श के आधार पर नियंत्रण पर ध्यान केंद्रित करते हुए, लेखकों का उद्देश्य संभावित अनुप्रयोगों का भविष्य का दृष्टिकोण विकसित करना और मानव-यंत्र सूचना प्रसंस्करण के भविष्य के पूरक में अंतर्दृष्टि प्रदान करना था। इन उदाहरणों से निकाली गई अनुसंधान एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए लेखकों ने पांच क्षेत्रों में प्रस्तावित किया। डिज़ाइन/प्रतिबंध/अवधारणा: यह लेख अपने स्वभाव में वैचारिक है, फिर भी विभिन्न अनुशासनों से एक सैमी-सिस्टमेटिक साहित्य समीक्षा और अनुभवजन्य रूप से मान्य भविष्य अनुसंधान प्रश्नों के साथ सामान्य वर्णन की पृष्ठभूमि प्रदान करती है। निष्कर्ष: AI को नियंत्रण में उपयोग के लिए गंभीर रूप से सीमित पाया गया है और इसे जटिलता और साइबरनेटिक्स के दृष्टिकोण से चर्चा की गई है। कुल तीन ऐसे सीमाएँ, अर्थात् ब्रीमरमैन सीमा, जटिल प्रणालियों की आंशिक पहचान और नियंत्रण की समस्याएँ और मानव और मशीन सूचना प्रसंस्करण के पूरक में अंतर्निहित पूर्वाग्रह, प्रमुख और प्रतिनिधि उदाहरणों के रूप में प्रस्तुत की गई हैं। लेखक फिर सावधानीपूर्वक स्पष्ट करते हैं कि मानव-यंत्र सहयोग किस तरह का हो सकता है, जो कार्य और वातावरण की विशिष्टताओं के आधार पर है। इसके साथ, लेखक भविष्य के अनुसंधान पर विभिन्न दृष्टिकोणों का प्रस्ताव करते हैं जो लेखा नेतृत्व में AI के आवेदन में क्रांतिकारी बदलाव ला सकते हैं। अनुसंधान सीमाएँ/प्रभाव: नियंत्रण में AI के मूल्य वादों पर भविष्य अनुसंधान को भौतिक और गणनात्मक प्रभावों पर ध्यान देना चाहिए और इसमें जटिलता का दृष्टिकोण शामिल करना चाहिए। व्यावहारिक प्रभाव: जटिल प्रणालियों में जानकारी की विशाल मात्रा के कारण लेखा और नियंत्रण के लिए AI के आवेदन में गंभीर सीमाएँ हो सकती हैं। मौलिकता/मूल्य: अनुसंधान एजेंडा पाँच क्षेत्रों में भिन्नता रखता है जो पिछले विचार-विमर्श से निकाले गए हैं। ये क्षेत्र इस प्रकार हैं: संगठनात्मक परिवर्तन, मानव-यंत्र सहयोग, विनियमन, तकनीकी नवाचार और नैतिक विचार। इन क्षेत्रों के लिए अनुसंधान प्रश्न, संभावित सैद्धांतिक आधार और विधिक विचार दिए गए हैं।
लॉसबिच्लर एट अल. (बुधवार,) ने इस प्रश्न का अध्ययन किया।
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