भारत में न्यायपालिका लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जिसका मुख्य उद्देश्य नागरिकों को त्वरित, निष्पक्ष एवं सुलभ न्याय प्रदान करना है। परंतु बढ़ते मुकदमों, लंबित मामलों तथा पारंपरिक न्यायिक प्रक्रियाओं की जटिलताओं ने न्याय प्रणाली को अत्यधिक बोझिल बना दिया है। सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) के विकास के साथ न्यायिक प्रणाली में डिजिटल परिवर्तन प्रारंभ हुआ, जिसके परिणामस्वरूप ई-कोर्ट्स (E-Courts) की अवधारणा विकसित हुई। ई-कोर्ट्स का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया को पारदर्शी, त्वरित, किफायती एवं तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है। भारत में ई-कोर्ट परियोजना के माध्यम से न्यायालयों के डिजिटलीकरण, ई-फाइलिंग, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, ऑनलाइन आदेश, डिजिटल रिकॉर्ड तथा वर्चुअल सुनवाई जैसी सुविधाएँ प्रारंभ की गई हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान ई-कोर्ट्स की उपयोगिता विशेष रूप से सामने आई। हालाँकि ई-कोर्ट्स की स्थापना ने न्यायिक प्रणाली को आधुनिक बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, परंतु इसके समक्ष अनेक चुनौतियाँ भी विद्यमान हैं। इनमें साइबर अपराध, डेटा चोरी, हैकिंग, डिजिटल साक्ष्यों की वैधता, गोपनीयता का उल्लंघन, तकनीकी असमानता तथा साइबर सुरक्षा से संबंधित खतरे प्रमुख हैं। यह शोध पत्र भारतीय न्यायिक प्रणाली में ई-कोर्ट्स की कानूनी वैधता एवं साइबर सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं का विश्लेषण करता है। साथ ही यह अध्ययन सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, भारतीय साक्ष्य अधिनियम, संवैधानिक प्रावधानों तथा न्यायालयीन निर्णयों के आधार पर ई-कोर्ट्स की विधिक स्थिति का परीक्षण करता है। अध्ययन में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि ई-कोर्ट्स भारतीय न्याय प्रणाली के आधुनिकीकरण की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण कदम हैं, परंतु उनकी सफलता के लिए मजबूत साइबर सुरक्षा ढाँचा, विधिक सुधार, तकनीकी प्रशिक्षण तथा डेटा संरक्षण कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक है।
प्रजापति et al. (Tue,) studied this question.