\\\"सुशासन\\\" प्रभावी लोकतान्त्रिक प्रशासन की आधारशिला है, जिसमें पारदर्शिता, जवाबदेही, उत्तरदायित्व और सहभागी निर्णय लेने के सिद्धान्त शामिल हैं। भारत में, \\\"सुशासन\\\" की खोज प्राचीन दार्शनिक आधारों से विकसित होकर समकालीन डिजिटल शासन पहलों तक पहुँच गई है, जो अर्थशास्त्र जैसे ग्रंथों में निहित हैं। यह शोधपत्र भारतीय सन्दर्भ में \\\"सुशासन\\\" की अवधारणात्मक रूपरेखा का विश्लेषण करता है, जिसमें भारत के शासन परिदृश्य की विशेषता बताने वाले संवैधानिक आधार, संस्थागत तन्त्र, नीतिगत नवाचार और निरन्तर चुनौतियों का विश्लेषण शामिल है। इसके अलावा, \\\"सूचना का अधिकार अधिनियम\\\", डिजिटल शासन मंचों और प्रशासनिक सुधारों जैसी प्रमुख पहलों की जाँच के माध्यम से, यह अध्ययन \\\"सुशासन\\\" मानकों को प्राप्त करने की दिशा में भारत की प्रगति का मूल्यांकन करता है, साथ ही उन क्षेत्रों की पहचान करता है जिन पर निरन्तर ध्यान और सुधार की आवश्यकता है।
मोहित कुमार रस्तोगी (Thu,) studied this question.