भारतीय संघीय व्यवस्था भारत के संविधान की एक महत्वपूर्ण विशेषता है, जिसमें केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का संवैधानिक विभाजन किया गया है। यह शोध पत्र राज्यों को प्राप्त संवैधानिक अधिकारों, उनकी व्यावहारिक स्थिति तथा बदलते राजनीतिक-प्रशासनिक संदर्भ में उनकी भूमिका का अध्ययन करता है।\भारतीय संविधान में संघीय ढांचे को अपनाते हुए केंद्र को अपेक्षाकृत अधिक शक्तियाँ प्रदान की गई हैं, जिससे भारतीय संघवाद को अर्ध-संघीय या केंद्रित संघवाद की संज्ञा दी जाती है। इस अध्ययन में डॉ. भीमराव अंबेडकर, के. सी. व्हेयर तथा अन्य राजनीतिक चिंतकों के संघवाद संबंधी विचारों का विश्लेषण किया गया है। साथ ही सातवीं अनुसूची के अंतर्गत संघ, राज्य और समवर्ती सूचियों में शक्तियों के विभाजन तथा अनुच्छेद 246, 256, 356 और 365 जैसे संवैधानिक प्रावधानों के माध्यम से राज्यों के अधिकारों और सीमाओं की विवेचना की गई है। शासन के स्तर पर योजना आयोग से नीति आयोग तक की यात्रा, जीएसटी व्यवस्था, वित्त आयोग तथा अंतर-राज्य परिषद जैसी संस्थाओं के प्रभाव का भी अध्ययन किया गया है। इस प्रकार भारतीय लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाने के लिए राज्यों के अधिकारों का सम्मान, संतुलित केंद्र-राज्य संबंध तथा प्रभावी संघीय शासन अनिवार्य है।\
अभिषेक कुमार (Thu,) studied this question.
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