विश्लेषण दर्शाता है कि लोक साहित्य संस्कृति को व्यक्त करता है, जो विभिन्न समाज विज्ञानों से जुड़ता है।
लोक संस्कृति के अंतर्गत लोक साहित्य सर्वाधिक महत्वपूर्ण अंग है, क्योंकि इसमें लोग संस्कृति के सभी अंगों की झलक मिलती हैi किसी भी समाज की मान्यताएं, अंधविश्वास, त्यौहार, रीति-रिवाज, गीत, गाथा, किस्से, कहानी, कहावतें, मुहावरे आदि का परिचय हमें लोक साहित्य के द्वारा ही मिलता हैi लोक साहित्य के अध्ययन से इतिहास, भूगोल, पुरातत्व, मनोविज्ञान, समाजशास्त्र, राजनीतिशास्त्र, अर्थशास्त्र, मानवशास्त्र, धर्मशास्त्र आदि अनेक समाज विज्ञानों के महत्वपूर्ण तथ्य मिलते हैंi लोक की भावनाओं को व्यक्त करने वाली व्यक्तित्वहीन अभिव्यक्ति को लोक साहित्य कहा जाता हैi लोकसाहित्य मौखिक एवं परंपरागत होता है, इसकी परंपरा अत्यंत प्राचीन है, तथा लोक साहित्य का क्षेत्र अत्यंत व्यापक और विस्तृत रहा हैi साधारण जनता का हंसना-रोना, गाना, खेलना-कूदना सभी लोकसाहित्य के अंतर्गत आ जाता हैi लोकसाहित्य परंपरा पोषक और संस्कृति संवाहक होता हैi इसमें कालानुरूप परिवर्तन बहुत धीमी गति से होता हैi
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Prof. Dr. Sunita Baban Pathare (2026) studied this question.
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