This research analyzes the significance of Aripan art in Mithila's cultural identity and women's contribution, indicating its vital role in tradition.
अरिपन मिथिला क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण प्राचीन लोकचित्रकला परंपरा है। यह मिथिला की संस्कृति, धार्मिक आस्था तथा सामाजिक जीवन को दर्शाती है। इसमें स्थानीय जीवन-दर्शन और आध्यात्मिक चेतना को ज्यामितीय संरचनाएँ, पौराणिक प्रतीक, प्राकृतिक तत्व तथा देवी-देवताओं से संबंधित चिह्नों के माध्यम से व्यक्त किया जाता है। अरिपन सौंदर्यीकरण के साथ-साथ सांस्कृतिक संप्रेषण का माध्यम भी है, जिसके द्वारा परंपराएँ और पौराणिक अवधारणाएँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ते हैं। पर्व, व्रत आदि विभिन्न शुभ अवसरों एवं संस्कारों के दौरान अंकित सामाजिक संरचना, दांपत्य जीवन की अवधारणा या सामुदायिक मान्यताओं की पुष्टि करते हैं। साथ ही इसमें मिथिला की पारंपरिक जीवनशैली के अभिन्न अंग के रूप में प्रकृति के प्रति सम्मान और पर्यावरणीय संतुलन की भावना भी दृष्टिगोचर होती है। न्यूज 18 बिहार , 24 मार्च, 2025 के अनुसार, “मिथिला में शुभ कार्यों में विशेष प्रकार की कला का उपयोग होता है जिसे अरिपन कहते हैं। इसमें कलाकृति के माध्यम से भगवान को अँकित किया जाता है। पहले केवल जमीन पर बनने वाला यह कला अब कागजों पर भी उपलब्ध है।“ ए बी पी लाइव, 23 जनवरी, 2023 के समाचार में मिथिला संस्कृति के अंतर्गत “भारतीय परंपरा में होते हैं विभिन्न प्रकार के 'अरिपन', जानें किन अवसरों पर कैसे अरिपन बनाने का है महत्व” पर प्रकाश डाला। हिंदुस्तान दैनिक पत्र, 13 अगस्त,2025 के अनुसार, “मधुबनी की पांच कलाकारों की टीम स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रपति भवन में 'अरिपन कला' का प्रदर्शन करेगी।” स्पष्ट है कि अरिपन की लोकप्रियता बहुत बढ़ी है। अरिपन एक जीवंत सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने, अपनी जड़ों से जोड़ने एवं पर्यावरण संरक्षण में बढ़ावा देती है। यह प्राचीन कला मिथिला क्षेत्र की महिलाओं द्वारा संरक्षित है। यह सजावट के साथ-साथ प्रतीकात्मक एवं पीढ़ियों से चली आ रही अनुष्ठानिक अभिव्यक्ति की भाषा है। अत: नई पीढ़ी को इस पारंपरिक कला की और अधिक जानकारी देने की आवश्यकता है। इस शोध-पत्र के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही पारंपरिक ज्ञान पद्धति को अरिपन के माध्यम से प्रकाश में लाने का प्रयास किया गया है। उनके सौंदर्य, जीवन दर्शन एवं पौराणिक परिप्रेक्ष्य का विवेचन करने का प्रयास किया गया है। यह एक अनुष्ठानिक कला है जिसका निर्माण मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा किया जाता है। इस कला के माध्यम से मिथिला की महिलाओं की रचनात्मकता, सांस्कृतिक भूमिका और ज्ञान-परंपरा की जानकारी मिलती है। अरिपन मिथिला की सांस्कृतिक निरंतरता और सामुदायिक चेतना का सशक्त माध्यम है। अतः इसे मिथिला की सांस्कृतिक पहचान और पौराणिक अवधारणा के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए।
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G. Sravan Kumar (2026) studied this question.
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