Analysis of language's role in societal progression, highlighting Hindi and Sanskrit's significance.
प्रगति चाहे देश की हो या समुदाय की उसमें भाषा की अहम् भूमिका होती है। भाषा न सिर्फ ज्ञान की संवाहक है वरन् देश की उन्नति एवं प्रगति की भी द्योतक है। ऐतिहासिक दृष्टि से देखने पर हम जान सकते हैं कि भारतवर्ष के धर्म, दर्शन, विज्ञान, चिकित्सा आदि विषयों की भाषा संस्कृत थी। हमारा जो कुछ श्रेष्ठ है, उत्तम हैं, रक्षणीय है वह इस भाषा के भण्डार में संचित किया गया है। संस्कृत भाषा मे साहित्य की रचना कम से कम छह हजार वर्षों से निरंतर होती आ रही है। आधुनिक युग मे हिंदी हमारे देश में सबसे ज्यादा लोगों द्वारा बोली या समझी जाने वाली भाषा है। इलेक्ट्रोनिक मीडिया द्वारा प्रदत्त विकसित जनसंचार, माध्यमों के अभाव में भी आजादी की लड़ाई के दौर से ही हिंदी को आम जनता तक पहुँचने का सबसे प्रभावशाली माध्यम माना गया और केशवचंद्र सेन से लेकर गांधी जी व चक्रवर्ती राजगोपालाचारी जैसे अहिंदी भाषी नेताओं ने इसे अपनाया और इसकी वकालत की। जहां तक आम जनता तक अपनी बात पहुंचाने का सवाल है कमोबेश आज भी हिंदी की इस स्थिति मे कोई अंतर नहीं आया है।
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Dr. Sonali Ramdas Hardas (2026) studied this question.
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